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ramayan 5.7.4: वे भवन बड़े परिश्रम से बनाए गए थे और इतने अद्भुत लग रहे थे, मानो स्वयं मयदानव ने उन्हें बनाया हो। हनुमान जी ने उन्हें देखा, लंका के राजा रावण के वे भवन इस पृथ्वी पर सभी गुणों में सर्वश्रेष्ठ थे।   |   ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.7.4 
तानि प्रयत्नाभिसमाहितानि
मयेन साक्षादिव निर्मितानि।
महीतले सर्वगुणोत्तराणि
ददर्श लंकाधिपतेर्गृहाणि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे भवन बड़े परिश्रम से बनाए गए थे और इतने अद्भुत लग रहे थे, मानो स्वयं मयदानव ने उन्हें बनाया हो। हनुमान जी ने उन्हें देखा, लंका के राजा रावण के वे भवन इस पृथ्वी पर सभी गुणों में सर्वश्रेष्ठ थे।
 
Those buildings were built with great effort and looked so wonderful, as if Mayadanav himself had built them. Hanuman ji saw them, those houses of Ravana, the king of Lanka, were the best in all qualities on this earth. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)