Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.7.3: वहाँ महाबली हनुमान ने नाना प्रकार के रत्नों से सुसज्जित घर देखे, जिनकी प्रशंसा देवता और दानव भी कर रहे थे। वे घर सर्वथा दोषरहित थे और रावण ने अपने प्रयत्नों से उन्हें प्राप्त किया था।   |   ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.7.3 
गृहाणि नानावसुराजितानि
देवासुरैश्चापि सुपूजितानि।
सर्वैश्च दोषै: परिवर्जितानि
कपिर्ददर्श स्वबलार्जितानि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महाबली हनुमान ने नाना प्रकार के रत्नों से सुसज्जित घर देखे, जिनकी प्रशंसा देवता और दानव भी कर रहे थे। वे घर सर्वथा दोषरहित थे और रावण ने अपने प्रयत्नों से उन्हें प्राप्त किया था।
 
There Hanuman, the great monkey, saw houses decorated with various kinds of gems, which even the gods and demons praised. Those houses were completely free from defects and Ravana had acquired them by his efforts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)