श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.7.2 
निवेशनानां विविधाश्च शाला:
प्रधानशङ्खायुधचापशाला:।
मनोहराश्चापि पुनर्विशाला
ददर्श वेश्माद्रिषु चन्द्रशाला:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मैंने नाना प्रकार के बैठक कक्ष, शंख, अस्त्र-शस्त्र और धनुष रखने के मुख्य कक्ष तथा पर्वतों के समान ऊँचे महलों के ऊपर सुन्दर एवं विशाल चन्द्रमा के समान कक्ष (बालकनियाँ) देखे॥2॥
 
There I saw various types of sitting rooms, main rooms for conches, weapons and bows, and beautiful and huge moon-like halls (balconies) on top of palaces as high as mountains.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)