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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.7.16 
तत: स तां कपिरभिपत्य पूजितां
चरन् पुरीं दशमुखबाहुपालिताम्।
अदृश्य तां जनकसुतां सुपूजितां
सुदु:खितां पतिगुणवेगनिर्जिताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दस सिर वाले रावण के पराक्रम से पोषित उस प्रशंसित नगरी में जाकर और सब दिशाओं में घूमने पर भी जब वानर-नायक हनुमान ने अपने पति के गुणों के बल से पराजित (मोहित) हुई, अत्यन्त दुःखी और परम पूजनीय जनक पुत्री सीता को न देखा, तो वे अत्यन्त चिंतित हो गए।
 
Thereafter going to that praised city which was nurtured by the might of ten-headed Ravana, and even after roaming around in all directions, Hanuman, the monkey-hero, became very worried when he did not see Janak's daughter Sita, who was very sad and highly respected, who was defeated (enchanted) by the force of her husband's qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)