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ramayan 5.7.15: उस सुन्दर एवं मनमोहक भवन (विमान) पर पहुँचकर, जो सुन्दर गुफाओं से युक्त पर्वत के समान तथा वसन्त ऋतु में सुन्दर खोखलों से युक्त अत्यन्त सुगन्धित वृक्ष के समान था, हनुमान जी को बड़ा आश्चर्य हुआ।   |   ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.7.15 
इतीव तद‍्गृहमभिगम्य शोभनं
सविस्मयो नगमिव चारुकन्दरम्।
पुनश्च तत्परमसुगन्धि सुन्दरं
हिमात्यये नगमिव चारुकन्दरम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस सुन्दर एवं मनमोहक भवन (विमान) पर पहुँचकर, जो सुन्दर गुफाओं से युक्त पर्वत के समान तथा वसन्त ऋतु में सुन्दर खोखलों से युक्त अत्यन्त सुगन्धित वृक्ष के समान था, हनुमान जी को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
On reaching that beautiful and charming building (plane) which was like a mountain with beautiful caves and like a very fragrant tree with beautiful hollows in the spring season, Hanuman was very astonished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)