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ramayan 5.7.11: महाकपि हनुमानजी ने वहाँ जो सुन्दर विमान देखा, उसका नाम पुष्पक था। वह रत्नों की आभा से चमक रहा था और इधर-उधर घूम रहा था। देवताओं के घर के समान श्रेष्ठ विमानों में वह महाकपि पुष्पक विमान सर्वाधिक पूजनीय था॥11॥   |   ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.7.11 
पुष्पाह्वयं नाम विराजमानं
रत्नप्रभाभिश्च विघूर्णमानम्।
वेश्मोत्तमानामपि चोच्चमानं
महाकपिस्तत्र महाविमानम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाकपि हनुमानजी ने वहाँ जो सुन्दर विमान देखा, उसका नाम पुष्पक था। वह रत्नों की आभा से चमक रहा था और इधर-उधर घूम रहा था। देवताओं के घर के समान श्रेष्ठ विमानों में वह महाकपि पुष्पक विमान सर्वाधिक पूजनीय था॥11॥
 
The beautiful plane that the great ape Hanuman saw there was named Pushpak. It was shining with the radiance of gems and was moving here and there. Among the best planes like houses of the gods, that great plane Pushpak was the most respected.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)