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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.7.1 
स वेश्मजालं बलवान् ददर्श
व्यासक्तवैदूर्यसुवर्णजालम्।
यथा महत्प्रावृषि मेघजालं
विद्युत्पिनद्धं सविहङ्गजालम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान ने भवनों का एक विशाल समूह देखा, जो नीलमणि से जड़ित स्वर्णिम खिड़कियों से सुसज्जित थे तथा पक्षियों से भरे हुए थे, तथा वर्षा ऋतु में बिजली से चमकते विशाल बादल के समान सुन्दर दिख रहे थे।
 
The mighty Hanuman saw a large group of buildings, decorated with golden windows studded with sapphires and teeming with birds, which looked as beautiful as a huge cloud filled with lightning during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)