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ramayan 5.68.7-8: हे वीर! हे वानरराज! मेरे सामने यह महान् संदेह उत्पन्न हो गया है कि जिन वानरों और भालुओं की आप सहायता कर रहे हैं, उनके रहते हुए भी वे रीछ-वानरों की सेनाएँ तथा वे दोनों राजकुमार श्री राम और लक्ष्मण इस विशाल समुद्र को कैसे पार करेंगे?॥ 7-8॥   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.68.7-8 
अयं च वीर संदेहस्तिष्ठतीव ममाग्रत:।
सुमहांस्त्वत्सहायेषु हर्यृक्षेषु हरीश्वर॥ ७॥
कथं नु खलु दुष्पारं तरिष्यन्ति महोदधिम्।
तानि हर्यृक्षसैन्यानि तौ वा नरवरात्मजौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! हे वानरराज! मेरे सामने यह महान् संदेह उत्पन्न हो गया है कि जिन वानरों और भालुओं की आप सहायता कर रहे हैं, उनके रहते हुए भी वे रीछ-वानरों की सेनाएँ तथा वे दोनों राजकुमार श्री राम और लक्ष्मण इस विशाल समुद्र को कैसे पार करेंगे?॥ 7-8॥
 
Valiant! O King of Monkeys! A great doubt has arisen before me that how will those armies of bears and monkeys and those two princes Shri Ram and Lakshman cross this vast ocean in spite of the presence of those monkeys and bears whose help you are?॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)