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ramayan 5.68.22: जब मैं स्वयं यहाँ आया हूँ, तो उन महाबली वानरों के आने में क्या संदेह रह सकता है? तुम्हें तो यह जानना ही चाहिए कि केवल नीच कुल के लोगों को ही दूत या संदेशवाहक बनाकर भेजा जाता है। उत्तम कुल के लोगों को नहीं भेजा जाता॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.68.22 
अहं तावदिह प्राप्त: किं पुनस्ते महाबला:।
नहि प्रकृष्टा: प्रेष्यन्ते प्रेष्यन्ते हीतरे जना:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब मैं स्वयं यहाँ आया हूँ, तो उन महाबली वानरों के आने में क्या संदेह रह सकता है? तुम्हें तो यह जानना ही चाहिए कि केवल नीच कुल के लोगों को ही दूत या संदेशवाहक बनाकर भेजा जाता है। उत्तम कुल के लोगों को नहीं भेजा जाता॥ 22॥
 
‘When I myself have come here, then what doubt can there be about the arrival of those mighty monkeys? You must know that only those people who belong to a low class are sent as messengers or messengers. People of a good class are not sent.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)