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ramayan 5.68.2: पवनकुमार! हे दशरथनन्दन, आप भगवान् श्री राम से अनेक प्रकार से ऐसी बातें कहें, जिससे वे रावण को मारकर मुझे शीघ्र ही समरांगण में पहुँचा दें॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.68.2 
एवं बहुविधं वाच्यो रामो दाशरथिस्त्वया।
यथा मां प्राप्नुयाच्छीघ्रं हत्वा रावणमाहवे॥ २॥
 
 
अनुवाद
पवनकुमार! हे दशरथनन्दन, आप भगवान् श्री राम से अनेक प्रकार से ऐसी बातें कहें, जिससे वे रावण को मारकर मुझे शीघ्र ही समरांगण में पहुँचा दें॥2॥
 
Pawan Kumar! You, Dashrathanandan, should say such things to Lord Shri Ram in many ways, so that he can kill Ravana and get me soon in Samarangana. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)