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सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना
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श्लोक 7
श्लोक
5.67.7
तां च दृष्ट्वा महाबाहो दारितां च स्तनान्तरे।
आशीविष इव क्रुद्धस्ततो वाक्यं त्वमूचिवान्॥ ७॥
अनुवाद
महाबाहो! उसकी छाती पर घाव देखकर आप विषैले सर्प के समान क्रोधित हो गए और इस प्रकार बोले-॥7॥
Mahabaho! Seeing the wound on his chest you became furious like a poisonous serpent and spoke thus -॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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