हे मनुष्यों! आपकी प्रियतमा, संयमी आर्या सीता ने बड़े दुःख के साथ ये सब बातें कही हैं। मैंने जो कुछ कहा है, उस पर विचार करके आप विश्वास करें कि परम तेजस्वी सीता सुरक्षित हैं।॥ 44॥
Lord of men! Your beloved, the restrained Arya Sita, has said all these things with great sorrow. After thinking over all that I have said, please believe that the most glorious Sita is safe.'॥ 44॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे सप्तषष्टितम: सर्ग:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)