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सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना
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श्लोक 42
श्लोक
5.67.42
यथा च स महाबाहुर्मां तारयति राघव:।
अस्माद्दु:खाम्बुसंरोधात् तत् त्वमाख्यातुमर्हसि॥ ४२॥
अनुवाद
वहाँ आप कुछ ऐसा कहें जिससे महाबाहु रघुनाथजी मुझे इस दुःखसागर से उबार लें।’ ॥42॥
You should say something there so that the mighty-armed Raghunathji may rescue me from this ocean of sorrow.' ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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