Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.67.39-40h: ‘वीर! जब राक्षस रावण ने मेरे अंगों को स्पर्श किया, तब मैं क्या कर सकता था? मृत्यु तो मुझे पहले ही कष्ट दे चुकी थी। अतः हे वानरश्रेष्ठ! उस स्थान पर जाओ जहाँ वे दोनों राजकुमार हैं।’॥39 1/2॥ | ramayan सर्ग 5.67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा च यदहं वीर स्पृष्टा गात्रेषु रक्षसा।
तत्राहं किं करिष्यामि कालेनोपनिपीडिता॥ ३९॥
गच्छ त्वं कपिशार्दूल यत्र तौ नृपते: सुतौ।
अनुवाद
‘वीर! जब राक्षस रावण ने मेरे अंगों को स्पर्श किया, तब मैं क्या कर सकता था? मृत्यु तो मुझे पहले ही कष्ट दे चुकी थी। अतः हे वानरश्रेष्ठ! उस स्थान पर जाओ जहाँ वे दोनों राजकुमार हैं।’॥39 1/2॥
‘Valiant! When the demon Ravana touched my body parts, what could I do then? Death had already tormented me. Therefore, O great monkey! Go to the place where those two princes are.’॥ 39 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥