सीतयाप्येवमुक्तोऽहमब्रुवं मैथिलीं तथा।
पृष्ठमारोह मे देवि क्षिप्रं जनकनन्दनि॥ ३६॥
यावत्ते दर्शयाम्यद्य ससुग्रीवं सलक्ष्मणम्।
राघवं च महाभागे भर्तारमसितेक्षणे॥ ३७॥
अनुवाद
सीताजी के ऐसा कहने पर मैंने उस मिथिला राजकन्या से कहा - 'देवि! जनकननदिनी! तुम शीघ्र ही मेरी पीठ पर चढ़ जाओ। हे महाभाग! श्यामलोकोण! अब मैं तुम्हें सुग्रीव और लक्ष्मण सहित तुम्हारे पति श्री रघुनाथजी का दर्शन कराता हूँ।'॥ 36-37॥
‘When Sitaji said this, I said to that Mithila princess—‘Devi! Janakanandini! You quickly climb on my back. O great one! Shyamlocone! I will now show you your husband Sri Raghunathji along with Sugreeva and Lakshmana.’॥ 36-37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)