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ramayan 5.67.30-31h: हे पराक्रमी योद्धा! फिर चारों ओर देखकर उसने अपने वस्त्रों से यह उत्तम मणि, जो चोटी में बाँधने योग्य थी, निकालकर मुझे दे दी।   |   ramayan सर्ग 5.67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  5.67.30-31h 
साभिवीक्ष्य दिश: सर्वा वेण्युद्‍ग्रथनमुत्तमम्॥ ३०॥
मुक्त्वा वस्त्राद् ददौ मह्यं मणिमेतं महाबल।
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी योद्धा! फिर चारों ओर देखकर उसने अपने वस्त्रों से यह उत्तम मणि, जो चोटी में बाँधने योग्य थी, निकालकर मुझे दे दी।
 
O mighty warrior! Then after looking around he took out this excellent gem, fit to be tied in a braid, from his clothes and gave it to me. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)