श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  5.67.28-29h 
हत्वा च समरे रौद्रं रावणं सहबान्धवम्॥ २८॥
राघवस्त्वां वरारोहे स्वपुरीं नयिता ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
वररोहे! समरांगण में भयंकर राक्षस रावण को उसके बन्धुओं सहित मारकर रघुनाथ जी तुम्हें अवश्य अपने धाम ले जायेंगे। 28 1/2॥
 
Vararohe! Raghunath ji will definitely take you to his abode after killing the fierce demon Ravana along with his relatives in Samarangana. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)