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ramayan 5.67.26-27h: ‘मैंने किसी प्रकार तुम्हारा दर्शन कर लिया है (तुम्हारा पता लगा लिया है), अतः अब शोक करने का समय नहीं है। भामिनी! तुम इसी क्षण अपने समस्त दुःखों का अंत देख लोगी।॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.67.26-27h 
कथंचिद् भवती दृष्टा न काल: परिशोचितुम्॥ २६॥
अस्मिन् मुहूर्ते दु:खानामन्तं द्रक्ष्यसि भामिनि।
 
 
अनुवाद
‘मैंने किसी प्रकार तुम्हारा दर्शन कर लिया है (तुम्हारा पता लगा लिया है), अतः अब शोक करने का समय नहीं है। भामिनी! तुम इसी क्षण अपने समस्त दुःखों का अंत देख लोगी।॥26 1/2॥
 
‘Somehow I have seen you (found out your whereabouts), so now there is no time to grieve. Bhamini! You will see the end of all your sorrows in this very moment.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)