श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  5.67.24-25h 
वैदेह्या वचनं श्रुत्वा करुणं साधुभाषितम्॥ २४॥
पुनरप्यहमार्यां तामिदं वचनमब्रुवम्।
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! विदेहनन्दिनी के करुणामय और कल्याणकारी वचन सुनकर मैंने पुनः आर्या सीता से यह कहा -
 
Raghunandan! After listening to the compassionate and good words of Videhanandini, I once again told Arya Sita this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)