श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  5.67.22-23h 
शक्तौ तौ पुरुषव्याघ्रौ वाय्वग्निसमतेजसौ॥ २२॥
सुराणामपि दुर्धर्षौ किमर्थं मामुपेक्षत:।
 
 
अनुवाद
वे दोनों सिंहपुरुष श्री राम और लक्ष्मण वायु और अग्नि के समान तेजस्वी और पराक्रमी हैं, तथा देवताओं के लिए भी अजेय हैं; फिर वे मेरी उपेक्षा क्यों कर रहे हैं?॥ 22 1/2॥
 
Those two lion-men, Shri Ram and Lakshman, are as radiant and powerful as the wind and the fire, and are invincible even for the gods; then why are they ignoring me?॥ 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)