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सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना
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श्लोक 21-22h
श्लोक
5.67.21-22h
भ्रातुरादेशमाज्ञाय लक्ष्मणो वा परंतप:॥ २१॥
स किमर्थं नरवरो न मां रक्षति राघव:।
अनुवाद
हनुमान् ! अथवा रघुकुल में श्रेष्ठ और तिलक, जो अपने भाई की आज्ञा लेकर शत्रुओं को संताप देते हैं, वे लक्ष्मण मेरी रक्षा क्यों नहीं करते ? 21 1/2॥
Hanuman! Or why doesn't Lakshman, the best of Raghukul and Tilak, who torments the enemies by taking his brother's orders, protect me? 21 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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