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श्लोक 16-17h
श्लोक
5.67.16-17h
मोघमस्त्रं न शक्यं तु कर्तुमित्येव राघव॥ १६॥
भवांस्तस्याक्षि काकस्य हिनस्ति स्म स दक्षिणम्।
अनुवाद
रघुनन्दन! वह ब्रह्मास्त्र व्यर्थ न जा सके, इसलिए आपने उस कौवे की दाहिनी आँख नष्ट कर दी।
Raghunandan! That Brahmastra could not be wasted, so you destroyed the right eye of that crow. 16 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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