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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.67.16-17h 
मोघमस्त्रं न शक्यं तु कर्तुमित्येव राघव॥ १६॥
भवांस्तस्याक्षि काकस्य हिनस्ति स्म स दक्षिणम्।
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! वह ब्रह्मास्त्र व्यर्थ न जा सके, इसलिए आपने उस कौवे की दाहिनी आँख नष्ट कर दी।
 
Raghunandan! That Brahmastra could not be wasted, so you destroyed the right eye of that crow. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)