श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.67.11 
ततस्तस्मिन् महाबाहो कोपसंवर्तितेक्षण:।
वायसे त्वं व्यधा: क्रूरां मतिं मतिमतां वर॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहो, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ! उस समय क्रोध से आपकी आँखें घूमने लगीं और आपने उस कौवे को कठोर दण्ड देने का विचार किया।
 
O Mahabaho, the best among the wise! At that time your eyes started rolling with anger and you thought of giving a severe punishment to that crow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)