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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 66: चूडामणि को देखकर और सीता का समाचार पाकर श्रीराम का उनके लिए विलाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.66.9 
इतस्तु किं दु:खतरं यदिमं वारिसम्भवम्।
मणिं पश्यामि सौमित्रे वैदेहीमागतां विना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
(अब उन्होंने लक्ष्मण से कहा-) 'सुमित्रनन्दन! सीता के यहाँ आए बिना ही मैं जल से उत्पन्न इस मणि को देख रहा हूँ। इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है?'॥9॥
 
(Now he said to Lakshmana-) 'Sumitra Nandan! I am seeing this gem which was produced from the water without Sita coming here. What can be more saddening than this?'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)