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ramayan 5.66.4: मेरे ससुर, राजा जनक ने वैदेही को उसके विवाह के समय यह रत्न दिया था। उसके सिर पर लटकाने पर यह बहुत सुंदर लग रहा था।   |   ramayan सर्ग 5.66: चूडामणि को देखकर और सीता का समाचार पाकर श्रीराम का उनके लिए विलाप   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 66: चूडामणि को देखकर और सीता का समाचार पाकर श्रीराम का उनके लिए विलाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.66.4 
मणिरत्नमिदं दत्तं वैदेह्या: श्वशुरेण मे।
वधूकाले यथा बद्धमधिकं मूर्ध्नि शोभते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मेरे ससुर, राजा जनक ने वैदेही को उसके विवाह के समय यह रत्न दिया था। उसके सिर पर लटकाने पर यह बहुत सुंदर लग रहा था।
 
My father-in-law, King Janaka, had given this precious stone to Vaidehi at the time of her marriage. It looked very beautiful when hung on her head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)