श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 66: चूडामणि को देखकर और सीता का समाचार पाकर श्रीराम का उनके लिए विलाप  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.66.13 
शारदस्तिमिरोन्मुक्तो नूनं चन्द्र इवाम्बुदै:।
आवृतो वदनं तस्या न विराजति साम्प्रतम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
शरद् ऋतु के चन्द्रमा के समान मेघों से आवृत, अंधकार से रहित सीता का मुख इस समय शोभायमान नहीं हो रहा होगा॥13॥
 
Sita's face, free from darkness but covered by clouds like the autumn moon, must not be looking beautiful at this time.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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