|
| |
| |
श्लोक 5.66.13  |
शारदस्तिमिरोन्मुक्तो नूनं चन्द्र इवाम्बुदै:।
आवृतो वदनं तस्या न विराजति साम्प्रतम्॥ १३॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| शरद् ऋतु के चन्द्रमा के समान मेघों से आवृत, अंधकार से रहित सीता का मुख इस समय शोभायमान नहीं हो रहा होगा॥13॥ |
| |
| Sita's face, free from darkness but covered by clouds like the autumn moon, must not be looking beautiful at this time.॥ 13॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|