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श्लोक 5.66.11  |
नय मामपि तं देशं यत्र दृष्टा मम प्रिया।
न तिष्ठेयं क्षणमपि प्रवृत्तिमुपलभ्य च॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| मुझे उस देश में ले चलो जहाँ तुमने मेरी प्रियतमा को देखा है। अब जब मैंने उसका समाचार सुन लिया है, तो मैं यहाँ एक क्षण भी नहीं रुक सकता॥ 11॥ |
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| Take me to the country where you have seen my beloved. Now that I have heard the news of her, I cannot stay here even for a moment.॥ 11॥ |
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