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ramayan 5.65.9-10h: हे प्रभु! जनकनन्दिनी सीता के दर्शन की इच्छा से मैं सौ योजन विस्तृत समुद्र को पार कर गया और उन्हें खोजता हुआ उसके दक्षिण तट पर पहुँच गया॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.65.9-10h 
समुद्रं लङ्घयित्वाहं शतयोजनमायतम्॥ ९॥
अगच्छं जानकीं सीतां मार्गमाणो दिदृक्षया।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जनकनन्दिनी सीता के दर्शन की इच्छा से मैं सौ योजन विस्तृत समुद्र को पार कर गया और उन्हें खोजता हुआ उसके दक्षिण तट पर पहुँच गया॥9 1/2॥
 
O Lord! Desiring to see Janakanandini Sita, I crossed the sea which was one hundred yojanas wide and while searching for her, I reached its southern shore.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)