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ramayan 5.65.27: रघुनन्दन! यह उस स्थान की कथा है, जो मैंने तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत की है। अब तुम सब प्रकार से समुद्र को पार करने का प्रयत्न करो।॥27॥   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.65.27 
एतदेव मयाऽऽख्यातं सर्वं राघव यद् यथा।
सर्वथा सागरजले संतार: प्रविधीयताम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! यह उस स्थान की कथा है, जो मैंने तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत की है। अब तुम सब प्रकार से समुद्र को पार करने का प्रयत्न करो।॥27॥
 
Raghunandan! This is the story of that place, all of which I have presented to you. Now try to cross the ocean in every possible way.'॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)