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ramayan 5.65.25: उसने यह भी कहा, ‘दशरथनंदन! मैं एक मास और जीवित रहूँगी। उसके बाद राक्षसों के प्रभाव में आकर प्राण त्याग दूँगी – किसी भी प्रकार जीवित नहीं रह सकूँगी।’॥25॥   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.65.25 
जीवितं धारयिष्यामि मासं दशरथात्मज।
ऊर्ध्वं मासान्न जीवेयं रक्षसां वशमागता॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसने यह भी कहा, ‘दशरथनंदन! मैं एक मास और जीवित रहूँगी। उसके बाद राक्षसों के प्रभाव में आकर प्राण त्याग दूँगी – किसी भी प्रकार जीवित नहीं रह सकूँगी।’॥25॥
 
‘She also said, ‘Dasarathanandan! I will live for one more month. After that I will give up my life under the influence of the demons – I will not be able to survive in any way.’॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)