Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.65.21-22h: आते समय जानकीजी ने मुझसे कहा, 'वायुनंदन! तुमने यहाँ मेरी जो भी दशा देखी है, वह सब भगवान राम से कहो और इस मणि को बड़ी सावधानी से सुरक्षित ले जाकर उन्हें सौंप दो।'   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  5.65.21-22h 
विज्ञाप्य: पुनरप्येष रामो वायुसुत त्वया।
अखिलेन यथा दृष्टमिति मामाह जानकी॥ २१॥
अयं चास्मै प्रदातव्यो यत्नात् सुपरिरक्षित:।
 
 
अनुवाद
आते समय जानकीजी ने मुझसे कहा, 'वायुनंदन! तुमने यहाँ मेरी जो भी दशा देखी है, वह सब भगवान राम से कहो और इस मणि को बड़ी सावधानी से सुरक्षित ले जाकर उन्हें सौंप दो।'
 
While coming, Janaki said to me, 'Vayanu Nandan! Whatever condition you have seen of me here, tell it all to Lord Rama and take this gem safely with great care and hand it over to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)