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ramayan 5.65.15: वह भूमि पर सोती है। जैसे शीतकाल में कमल का फूल पाले से सूख जाता है, वैसे ही उसके अंगों की कान्ति फीकी पड़ गई है। उसे रावण से कोई प्रयोजन नहीं है। उसने प्राण त्यागने का निश्चय कर लिया है॥15॥   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.65.15 
अध:शय्या विवर्णाङ्गी पद्मिनीव हिमागमे।
रावणाद् विनिवृत्तार्था मर्तव्यकृतनिश्चया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह भूमि पर सोती है। जैसे शीतकाल में कमल का फूल पाले से सूख जाता है, वैसे ही उसके अंगों की कान्ति फीकी पड़ गई है। उसे रावण से कोई प्रयोजन नहीं है। उसने प्राण त्यागने का निश्चय कर लिया है॥15॥
 
‘She sleeps on the ground. Just as the lotus flower dries up due to frost in winter, similarly the lustre of her limbs has faded. She has no use for Ravana. She has decided to give up her life.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)