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ramayan 5.65.13-14: हे वीर! देवी सीता आपके सान्निध्य में रहने योग्य हैं, किन्तु इस समय वे महान दुःख में दिन बिता रही हैं। उन्हें रावण के हरम में रखा गया है और राक्षसियों ने उन पर पहरा दिया है। वे सिर पर जटा धारण किए हुए सदैव आपकी चिन्ता में रहती हैं, दुःखी रहती हैं और आपके ही विचारों में मग्न रहती हैं॥13-14॥   |   ramayan सर्ग 5.65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  5.65.13-14 
दु:खमापद्यते देवी त्वया वीर सुखोचिता॥ १३॥
रावणान्त:पुरे रुद्धा राक्षसीभि: सुरक्षिता।
एकवेणीधरा दीना त्वयि चिन्तापरायणा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! देवी सीता आपके सान्निध्य में रहने योग्य हैं, किन्तु इस समय वे महान दुःख में दिन बिता रही हैं। उन्हें रावण के हरम में रखा गया है और राक्षसियों ने उन पर पहरा दिया है। वे सिर पर जटा धारण किए हुए सदैव आपकी चिन्ता में रहती हैं, दुःखी रहती हैं और आपके ही विचारों में मग्न रहती हैं॥13-14॥
 
Valiant one! Goddess Sita is worthy of enjoying your company, but at present she is spending her days in great sorrow. She has been kept in Ravana's harem and is under the guard of demonesses. Wearing a braid on her head, she is always worried about you, sad and immersed in your thoughts.॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)