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ramayan 5.64.6: सौम्य! इन पहरेदारों ने अज्ञानवश तुम्हें रोक लिया और क्रोधपूर्वक मधु पीने से मना किया, इसलिए तुम मन में क्रोध मत करो॥6॥   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.64.6 
सौम्य रोषो न कर्तव्यो यदेभि: परिवारणम्।
अज्ञानाद् रक्षिभि: क्रोधाद् भवन्त: प्रतिषेधिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! इन पहरेदारों ने अज्ञानवश तुम्हें रोक लिया और क्रोधपूर्वक मधु पीने से मना किया, इसलिए तुम मन में क्रोध मत करो॥6॥
 
Soumya! Do not be angry in your mind because these guards stopped you out of ignorance and angrily forbade you from drinking honey. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)