श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.64.45 
प्रीत्या च परयोपेतो राघव: परवीरहा।
बहुमानेन महता हनूमन्तमवैक्षत॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले श्री रघुनाथजी ने हनुमानजी की ओर अत्यंत प्रेम और महान आदर से देखा॥45॥
 
Shri Raghunathji, the destroyer of enemy warriors, looked towards Hanumanji with utmost love and great respect. 45॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे चतु:षष्टितम: सर्ग:॥ ६४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें चौंसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६४॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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