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ramayan 5.64.43: हनुमानजी के मुख से अमृत के समान मधुर ये वचन सुनकर कि, 'मैंने देवी सीता को देखा है', लक्ष्मण और श्रीराम अत्यन्त प्रसन्न हुए।   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.64.43 
दृष्टा देवीति हनुमद्वदनादमृतोपमम्।
आकर्ण्य वचनं रामो हर्षमाप सलक्ष्मण:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के मुख से अमृत के समान मधुर ये वचन सुनकर कि, 'मैंने देवी सीता को देखा है', लक्ष्मण और श्रीराम अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
On hearing these words from Hanuman, which were as sweet as nectar, 'I have seen Goddess Sita', Lakshmana and Sri Rama were very pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)