श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.64.42 
हनूमांश्च महाबाहु: प्रणम्य शिरसा तत:।
नियतामक्षतां देवीं राघवाय न्यवेदयत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु हनुमान ने श्री रघुनाथजी के चरणों में प्रणाम करके उनसे कहा कि 'देवी सीता पतिव्रता धर्म के कठोर नियमों का पालन करते हुए शारीरिक रूप से सुरक्षित हैं'॥42॥
 
Mahabahu Hanuman bowed down at the feet of Shri Raghunathji and told him that 'Goddess Sita is physically safe following the strict rules of patriotism'. 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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