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ramayan 5.64.32: हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले श्री राम! आपको पाकर माता कौशल्या ने एक महान बालक को जन्म दिया है। आप धैर्य रखें। इसमें कोई संदेह नहीं है कि देवी सीता को देखा गया है। किसी और ने नहीं, केवल हनुमान जी ने ही उन्हें देखा है॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.64.32 
कौसल्या सुप्रजा राम समाश्वसिहि सुव्रत।
दृष्टा देवी न संदेहो न चान्येन हनूमता॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले श्री राम! आपको पाकर माता कौशल्या ने एक महान बालक को जन्म दिया है। आप धैर्य रखें। इसमें कोई संदेह नहीं है कि देवी सीता को देखा गया है। किसी और ने नहीं, केवल हनुमान जी ने ही उन्हें देखा है॥ 32॥
 
O Shri Ram, the one who observes the best fast! By getting you, mother Kausalya has given birth to a great child. You should be patient. There is no doubt that Devi Sita has been seen. No one else, only Hanuman ji has seen her.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)