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ramayan 5.64.31: मेरे पूर्वजों का यह मधुवन (वन), जिसकी मेरे पूर्वजों ने सदैव रक्षा की है, जनक की पुत्री को देखे बिना कोई भी इसे नष्ट नहीं कर सकता।   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.64.31 
पितृपैतामहं चैतत् पूर्वकैरभिरक्षितम्।
न मे मधुवनं हन्याददृष्ट्वा जनकात्मजाम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मेरे पूर्वजों का यह मधुवन (वन), जिसकी मेरे पूर्वजों ने सदैव रक्षा की है, जनक की पुत्री को देखे बिना कोई भी इसे नष्ट नहीं कर सकता।
 
This Madhuvana (forest) of my forefathers, which my ancestors have always protected, no one could destroy without seeing Janaka's daughter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)