श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.64.30 
यद्यप्यकृतकृत्यानामीदृश: स्यादुपक्रम:।
भवेत् तु दीनवदनो भ्रान्तविप्लुतमानस:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि ऐसा देखा गया है कि लोग अपना काम पूरा न होने पर भी घर लौट आते हैं, तथापि उस स्थिति में अंगद का मुख विषाद से ढका रहता और उसका मन चिन्ता से व्याकुल रहता॥30॥
 
Although it has been seen that people return home even after their work has not been accomplished, yet in that case the face of the Angad would be covered with gloom and his mind would be in turmoil due to anxiety.॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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