श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.64.3 
स यथैवागत: पूर्वं तथैव त्वरितं गत:।
निपत्य गगनाद् भूमौ तद् वनं प्रविवेश ह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे पहले की भाँति शीघ्रता से वहाँ पहुँचे और आकाश से पृथ्वी पर उतरकर मधुवन में प्रवेश कर गए॥3॥
 
They reached there as quickly as they had come before and, descending from the sky to the earth, they entered the Madhuvana forest. ॥3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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