श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  5.64.28-29 
अङ्गदस्य प्रहर्षाच्च जानामि शुभदर्शन॥ २८॥
न मत्सकाशमागच्छेत् कृत्ये हि विनिपातिते।
युवराजो महाबाहु: प्लवतामङ्गदो वर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सुप्रभात श्री राम! अंगद के महान् हर्ष से मुझे यही सूचना मिल रही है। यदि कार्य बिगड़ जाता तो वानरों में श्रेष्ठ महाबाहु राजकुमार अंगद मेरे पास कभी न लौटते। 28-29॥
 
Good morning Shri Ram! I am getting the same information from Angad's great happiness. If the work had been spoiled then the great-armed Prince Angad, the best among the monkeys, would never have returned to me. 28-29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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