श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  5.64.27-28h 
समाश्वसिहि भद्रं ते दृष्टा देवी न संशय:॥ २७॥
नागन्तुमिह शक्यं तैरतीतसमयैरिह।
 
 
अनुवाद
प्रभु! धैर्य रखें। आपका कल्याण हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि सीता देवी मिल गई हैं; क्योंकि ये वानर बिना समय पूरा किए यहाँ आ ही नहीं सकते थे।
 
Prabhu! Have patience. May you be blessed. There is no doubt that Sita Devi has been found; because these monkeys could never have come here without completing the given time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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