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श्लोक 5.64.26-27h  |
अङ्गदे समनुप्राप्ते सुग्रीवो वानरेश्वर:॥ २६॥
उवाच शोकसंतप्तं रामं कमललोचनम्। |
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| अनुवाद |
| अंगद के पास पहुँचते ही वानरराज सुग्रीव ने शोकग्रस्त कमलनयन श्री राम से कहा- 26 1/2॥ |
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| As soon as he reached near Angad, the monkey king Sugriva said to the grief-stricken Kamalanayan Shri Ram - 26 1/2॥ |
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