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ramayan 5.64.25-26h: अंगद और वानर नायक हनुमान्‌जी को आगे करके सब वेगशाली वानर सहसा आकाश में उछल पड़े और वायु से उड़े हुए बादलों के समान बड़े जोर से गर्जना करते हुए किष्किन्धा के निकट पहुँच गए॥25 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  5.64.25-26h 
अङ्गदं पुरत: कृत्वा हनूमन्तं च वानरम्।
तेऽम्बरं सहसोत्पत्य वेगवन्त: प्लवङ्गमा:॥ २५॥
विनदन्तो महानादं घना वातेरिता यथा।
 
 
अनुवाद
अंगद और वानर नायक हनुमान्‌जी को आगे करके सब वेगशाली वानर सहसा आकाश में उछल पड़े और वायु से उड़े हुए बादलों के समान बड़े जोर से गर्जना करते हुए किष्किन्धा के निकट पहुँच गए॥25 1/2॥
 
Putting Angad and the monkey hero Hanuman in front, all the fast monkeys suddenly jumped into the sky and roared loudly like clouds blown by the wind and reached near Kishkindha. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)