श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.64.23 
एवं तु वदतां तेषामङ्गद: प्रत्यभाषत।
साधु गच्छाम इत्युक्त्वा खमुत्पेतुर्महाबला:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब वानरों ने ऐसी बातें कहना शुरू किया, तब अंगद ने कहा, ‘बहुत अच्छा, अब हम चले जाएँ।’ ऐसा कहकर वे महाबली वानर आकाश में उड़ गए॥23॥
 
When the monkeys started saying such things, Angad said, 'Very well, let us leave now.' Saying this the mighty monkeys flew into the sky.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas