श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.64.22 
त्वया ह्यनुक्तैर्हरिभिर्नैव शक्यं पदात् पदम्।
क्वचिद् गन्तुं हरिश्रेष्ठ ब्रूम: सत्यमिदं तु ते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! आपकी आज्ञा के बिना हम वानर कहीं एक कदम भी नहीं जा सकते, यह हम आपसे सत्य कह रहे हैं।॥22॥
 
O best of monkeys! Without getting your permission we monkeys cannot go even a single step anywhere, we are telling you the truth.'॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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