|
| |
| |
श्लोक 5.64.22  |
त्वया ह्यनुक्तैर्हरिभिर्नैव शक्यं पदात् पदम्।
क्वचिद् गन्तुं हरिश्रेष्ठ ब्रूम: सत्यमिदं तु ते॥ २२॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे वानरश्रेष्ठ! आपकी आज्ञा के बिना हम वानर कहीं एक कदम भी नहीं जा सकते, यह हम आपसे सत्य कह रहे हैं।॥22॥ |
| |
| O best of monkeys! Without getting your permission we monkeys cannot go even a single step anywhere, we are telling you the truth.'॥ 22॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|