Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.64.19: हे राजन! वानरश्रेष्ठ! कौन स्वामी होकर भी अपने अधीनस्थों से इस प्रकार बात करेगा? प्रायः लोग धन के मद में चूर होकर अहंकारवश अपने को ही श्रेष्ठ समझने लगते हैं॥19॥ | ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं वक्ष्यति को राजन् प्रभु: सन् वानरर्षभ।
ऐश्वर्यमदमत्तो हि सर्वोऽहमिति मन्यते॥ १९॥
अनुवाद
हे राजन! वानरश्रेष्ठ! कौन स्वामी होकर भी अपने अधीनस्थों से इस प्रकार बात करेगा? प्रायः लोग धन के मद में चूर होकर अहंकारवश अपने को ही श्रेष्ठ समझने लगते हैं॥19॥
‘O King! Best of the apes! Who, even though a master, would talk like this to his subordinates? Usually, people become intoxicated with wealth and due to arrogance start considering themselves to be supreme.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥