श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.64.15 
पीत्वा मधु यथाकामं विक्रान्ता वनचारिण:।
किं शेषं गमनं तत्र सुग्रीवो यत्र वानर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वीर वानरों ने जितना मधु पीना चाहा, पी लिया। अब यहाँ क्या काम बाकी रह गया है? इसलिए हमें वहाँ जाना चाहिए जहाँ वानरराज सुग्रीव हैं॥ 15॥
 
The valiant monkeys have drunk as much honey as they wanted. Now what work is left to be done here. Therefore we should go to the place where the monkey king Sugreeva is.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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