श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  5.64.11-12h 
प्रहृष्टो मां पितृव्यस्ते सुग्रीवो वानरेश्वर:॥ ११॥
शीघ्रं प्रेषय सर्वांस्तानिति होवाच पार्थिव:।
 
 
अनुवाद
'तुम्हारे चाचा, वानरराज सुग्रीव ने बड़ी प्रसन्नता से मुझसे उन सबको शीघ्र यहाँ भेजने के लिए कहा है।'
 
‘Your uncle, the monkey king Sugreeva, has asked me very happily to send them all here quickly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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